यहां हमने यूपी बोर्ड कक्षा 12 वीं की गणित एनसीईआरटी सॉल्यूशंस पीएफडी को दी हैं। up board solutions for class 12 maths pdf Download करे| up board solutions for class 12 maths notes will help you. ncert solutions for class 12 maths pdf up board download.
हम आशा करते है कि यह सॉल्यूशंस आपकी मदद करेंगे। यदि आपके पास इस टॉपिक से रिलेटेड से संबंधित कोई प्रश्न है, आप Comment करके हमे बता सकते है | इस टॉपिक के expert टीम मेंबर आपको solution प्रदान करेंगे|
यहां हमने यूपी बोर्ड कक्षा 12 वीं की English एनसीईआरटी सॉल्यूशंस पीएफडी को दी हैं। up board solutions for class 12 English pdf Download करे| up board solutions for class 12 English notes will help you. ncert solutions for class 12 English pdf up board download, up board solutions for class 12 English
हम आशा करते है कि यह सॉल्यूशंस आपकी मदद करेंगे। यदि आपके पास इस टॉपिक से रिलेटेड से संबंधित कोई प्रश्न है, आप Comment करके हमे बता सकते है | इस टॉपिक के expert टीम मेंबर आपको solution प्रदान करेंगे|
मनुष्य दो प्रकार से अपने भावों को प्रकट करता है- बोलकर और लिखकर। इसी आधार पर भाषा के दो रूप बने हैं- मौखिक और लिखित। मौखिक भाषा से दो प्रकार के कौशलों का विकास होता है- वाचन (बोलना) और श्रवण (सुनना)।
मौखिक अभिव्यक्ति का उद्देश्य केवल अपनी बात दूसरे तक पहुँचाना ही नहीं है, अपितु भाषा को सही रूप से प्रयोग करना तथा प्रत्येक प्रत्येक अवसर के अनुसार भाषा का उचित प्रयोग करना भी है; जैसे-बड़ों के लिए अलग प्रकार की शब्दावली का प्रयोग किया जाता है (आप, कृपया, कीजिए, बैठिए, क्षमा कीजिए आदि)।
औपचारिक व अनौपचारिक संबंधों में अलग-अलग तरह की भाषा का प्रयोग किया जाता है।विवाह, उत्सव आदि अवसरों पर तथा शोक, दुर्घटना आदि के समय पर एक ही तरह की भाषा प्रयोग नहीं की जा सकती।
मौखिक अभिव्यक्ति के लिए निम्नलिखित बातों को ध्यान में रखना चाहिए :
शुद्ध व स्पष्ट उच्चारण।उचित शब्दावली का प्रयोग।छोटे व सटीक वाक्य।भावानुकूल, सहज भाषा का प्रयोग।विराम-चिह्न किस बात पर बल देना है या किस पर नहीं- इस बात का ध्यान रखना।निस्संकोच भाव से/आत्मविश्वास के साथ बोलना।
जब किसी वस्तु के परमाणुओं में इलेक्ट्रोनों की संख्या प्रोटोनों की संख्या से भिन्न हो जाती है तो वह आवेशित हो जाती है। इलेक्ट्रॉनो की कमी हो जाने पर वस्तु धनावेशित और इलेक्ट्रॉनो की अधिकता होने पर वस्तु ऋण आवेशित हो जाती है।
इलेक्ट्रॉन के आवेश के परिमाण को मूल आवेश कहते है।
मूल आवेश e = 1.6 x 10-19 कुलाम
आवेशन की विधियाँ (methods of charging in hindi) :
किसी वस्तु को आवेशित करने की निम्न विधियाँ है –
एक वस्तु को घर्षण , चालन , प्रेरण , ऊष्मीय उत्सर्जन , प्रकाश वैद्युत प्रभाव और क्षेत्र उत्सर्जन आदि विधियों द्वारा आवेशित किया जा सकता है।
1. घर्षण द्वारा आवेशन : दो वस्तुओ को परस्पर रगड़ने पर इलेक्ट्रॉन एक वस्तु से दूसरी वस्तु पर स्थानान्तरित हो जाते है जिससे एक वस्तु धनावेशित व दूसरी वस्तु ऋणावेशित हो जाती है। उदाहरण के लिए काँच की छड़ को रेशम से रगड़ने पर छड धनावेशित व रेशम ऋण आवेशित हो जाता है। बादल भी घर्षण के कारण आवेशित हो जाते है। घर्षण द्वारा आवेशन में आवेश संरक्षण नियम का पालन होता है। एक वस्तु से दूसरी वस्तु पर इलेक्ट्रॉनों के स्थानान्तरण के कारण समान मात्रा में धनावेश तथा ऋणावेश उत्पन्न होते है।
2. चालन या चालकीय विद्युतीकरण अथवा भौतिक स्पर्श द्वारा आवेशन : यदि किसी अनावेशित चालक को आवेशित चालक से स्पर्श कराया जाता है तो अनावेशित चालक पर आवेशित चालक के बराबर आवेश प्राप्त किया जा सकता है। ऐसा इसलिए होता है क्योंकि स्पर्श बिंदु पर कुछ इलेक्ट्रॉन स्थानांतरित हो जाते है। उदाहरण के लिए यदि किसी अनावेशित इलेक्ट्रोस्कोप की चकती को ऋणात्मक आवेशित छड से स्पर्श कराया जाता है तो इलेक्ट्रोस्कोप की पत्तियां भी ऋणात्मक आवेश ग्रहण कर लेती है। इस तरह आवेश विभाजित हो जाता है और वह अपरिवर्तित रहता है।
अर्थात कोई आवेशित पिण्ड या वस्तु जब किसी आवेशित चालक के सम्पर्क में आती है तो वह आवेश का कुछ बंटवारा कर सकती है।
ध्यान दे कि जब किसी चालक को धनावेशित किया जाता है तो उसका द्रव्यमान घट जाता है क्योंकि उस चालक से इलेक्ट्रोनों को त्यागा जाता है।
जब किसी चालक को ऋण आवेशित किया जाता है तो उसका द्रव्यमान बढ़ जाता है क्योंकि वह चालक इलेक्ट्रोनो को ग्रहण कर रहा है।
समान प्रकार के आवेश एक दुसरे को प्रतिकर्षित करते है जबकि विपरीत आवेश एक दुसरे को आकर्षित करते है , इस नियम को कैवेन्डिश का स्थिर विद्युत आकर्षण और प्रतिकर्षण का नियम कहते है।
3. प्रेरण द्वारा आवेशन : यदि किसी उदासीन वस्तु के पास कोई आवेशित वस्तु लायी जाती है तो आवेशित वस्तु उदासीन वस्तु में स्थित विपरीत प्रकृति के आवेशो को समीप खींचती है और समान प्रकृति के आवेशो को प्रतिकर्षित करती है इसके कारण उदासीन वस्तु का एक किनारा धनावेशित तथा दूसरा किनारा ऋणावेशित हो जाता है।
याद रखे कि प्रेरण उत्पन्न करने वाली वस्तु न तो आवेश प्राप्त करती है और न ही आवेश खोती है।
प्रेरित आवेश सदैव प्रेरण करने वाले आवेश से विपरीत प्रकृति का होता है।